09.30.08
Posted in NEWS FROM INDIA at 1:52 pm by YUDHISTRA
इस विधेयक की मुख्य बातें इस प्रकार हैं-
*दोहरी नागरिकता हासिल करने वाले विदेशी पासपोर्टधारियों के भारत आने-जाने में अब कोई बाधा नहीं होगी, क्योंकि इसके बाद उनके पास कई तरह के वीजा की कोई जरूरत नहीं है।
*आर्थिक रूप से संपन्न एवं आधुनिक देशों में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों के पास दिमाग के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता हासिल है। इसमें कोई दुविधा नहीं कि निवेश के माहौल और वर्तमान वाणिज्यिक दौर में इसका मुख्य ध्येय निवेश बढ़ाना है। दोहरी नागरिकता के माध्यम से निवेश और संसाधनों के लेन-देन के मामले में यह सुविधा बेहद मददगार साबित होगी।
*हालांकि प्रवासी भारतीयों के लिए दोहरी नागरिकता की मांग के पीछे मुख्य कारण देश के प्रति भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक लगाव रहा है। भारतीय मूल के नागरिकों के अपने मूल देश की संस्कृति से भावनात्मक जुड़ाव को और मजबूत करने के लिहाज से यह पहल बेहद प्रासंगिक है। गौरतलब है कि प्रवासी भारतीय अपनी गतिविधियों के माध्यम से मौके-मौके पर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अपना योगदान करते रहते हैं। दोहरी नागरिकता इस बंधन को और मजबूत करने के साथ ही प्रवासी भारतीयों को देश के सामाजिक विकास में सीधा योगदान के लिए प्रेरित करेगी।
*दोहरी नागरिकता विदेशों में रहने वाली नई पीढ़ी के भारतवंशियों की अपने मूल देश के साथ रिश्तों को और मजबूती करेगी। इसके साथ उन्हें अपनी जड़ों से जुड़े रहने का भी मौका मिलेगा।
पहले प्रवासी भारतीय दिवस ने दुनिया के विभिन्न कोनों में रहने वाले भारतवंशियों को एक मंच पर लाने का दुरूह कार्य पूरा कर दिया है। इस सफल आयोजन के माध्यम से ही पहली बार महान भारतीय परिवार की उपलब्धियों का लोगों को जानकारी मिली। दूसरा प्रवासी भारतीय दिवस इस प्रयास को और आगे बढ़ाने के साथ ही परिवार के आपसी विश्वास को और मजबूत करेगा। दूसरा प्रवासी दिवस पहले प्रवासी दिवस पर होने वाली घोषणाओं के पूरे होने का गवाह भी बनेगा। इसके अलावा अभी खाड़ी बीमा योजना और विदेशी सहायता कानून में परिवर्तन संबंधी कई घोषणाएं बाकी हैं। इस मौके पर पहले प्रवासी दिवस पर ली गई सामूहिक पहल को आगे बढ़ाने के साथ ही प्रवासी भारतीयों को एक साथ एकत्रित करके वैश्विक भारतीय परिवार की क्षमता को सूत्रबद्ध करने का काम सर्वप्रमुख एजेंडे में होगा।
पहले प्रवासी भारतीय दिवस के प्रतिनिधियों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर कार्यक्रम के आयोजक फिक्की का मानना है कि इससे देश को महत्वपूर्ण राजनयिक उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इस आयोजन से प्रवासियों के मन में भारत के प्रति एक सकारात्मक सोच विकसित हुई है।
दोहरी नागरिकता हासिल करने वाले देश-
1. अमेरिका
2. कनाडा
3. ब्रिटेन
4. हालैंड
5. इटली
6. आयरलैंड
7. पुर्तगाल
8. स्विटजरलैंड
9. ग्रीस
10. साइप्रस
11. इस्त्राइल
12. ऑस्ट्रेलिया
13. न्यूजीलैंड
14. फ्रांस
15. स्वीडन
16. फिनलैंड
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Posted in Media Council, THE SANGAM FOUNDATION at 1:44 pm by YUDHISTRA
प्रवासी भारतीय दुनिया भर में फैले हैं। 48 देशों में रह रहे प्रवासी भारतीयों की जनसंख्या करीब 2 करोड़ है। इनमें से 11 देशों में 5 लाख से ज्यादा प्रवासी भारतीय वहां की औसत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं और वहां की आर्थिक व राजनीतिक दशा व दिशा को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यहां उनकी आर्थिक, शैक्षणिक व व्यावसायिक दक्षता का आधार काफी मजबूत है। वे विभिन्न देशों में रहते हैं, अलग भाषा बोलते हैं परंतु वहां के विभिन्न क्रियाकलापों में अपनी महती भूमिका निभाते हैं। प्रवासी भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के कारण ही साझा पहचान मिली है और यही कारण है जो उन्हें भारत से गहरे जोड़ता है।
जहां-जहां प्रवासी भारतीय बसे वहां उन्होंने आर्थिक तंत्र को मजबूती प्रदान की और बहुत कम समय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर लिया। वे मजदूर, व्यापारी, शिक्षक अनुसंधानकर्ता, खोजकर्ता, डाक्टर, वकील, इंजीनियर, प्रबंधक, प्रशासक आदि के रूप में दुनियाभर में स्वीकार किए गए। प्रवासियों की सफलता का श्रेय उनकी परंपरागत सोच, सांस्कृतिक मूल्यों, शैक्षणिक योग्यता को दिया जा सकता है। कई देशों में वहां के मूल निवासियों की अपेक्षा भारतवंशियों की प्रति व्यक्ति आय ज्यादा है। वैश्रि्वक स्तर पर सूचना तकनीक के क्षेत्र में क्रांति में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिसके कारण भारत की विदेशों में छवि निखरी है। प्रवासी भारतीयों की सफलता के कारण भी आज भारत आर्थिक विश्व में आर्थिक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है।
डा. एल. एम. सिंघवी की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने प्रवासी भारतीयों पर 18 अगस्त 2000 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। रिपोर्ट में प्रवासी भारतीयों पर बनाई गई उच्चस्तरीय कमेटी को पहला ऐतिहासिक कदम बताते हुए इस बात की आशा व्यक्त की गई है कि कमेटी द्वारा जो सुझाव दिए पर सरकार पहल करेगी।
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Posted in Media Council at 1:42 pm by YUDHISTRA
जापान के लोगों में पिछले चार पांच वर्ष में भारतीय खाने के प्रति दीवानगी में जबरदस्त इजाफा हुआ है और यहां हर साल भारतीय खाद्य पदार्थो खासकर प्रसंस्करित एवं पैकड भोजन की मांग में 25 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है।
जापान में पिछले दस वर्ष से भारत से चावल, मसाले, जूस, फलों का पल्प, घी, पैकेज्ड सब्जियां आयात करने वाले एमटीआर और अंबिका ट्रेडिंग कंपनी की यहां के बाजार में 85 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी है। उनका कहना है कि जापान यदि खाद्य पदार्थो के आयात से जुडे अत्यंत सख्त नियम ढीले कर दे तो हिंदुस्तानी खाने विशेष रुप से तरी वाली पैकड सब्जियों का आयात शायद रिकार्ड ही तोड दे।
जापानी राजधानी के बीचोबीच मोयोगी उद्यान में चल रहे भारतीय सांस्कृतिक उत्सव, नमस्ते इंडिया 2008 में उमडी स्थानीय नागरिकों की भीड सबसे पहले यहां के फूड कोर्ट में धावा बोलती है। चिकन करी, चिकन बिरयानी, चना मसाला और नान लेने वालों की लंबी कतारें आयात कंपनियों के दावे को पुख्ता करती है।
जापान में भारतीय खाद्य पदार्थो की आपूर्ति करने वाले आन लाइन स्टोर इंडोजिन डाट काम के निदेशक राकेश सौमैय्या कहते है कि तीन साल पहले ही उन्होंने अपना आन लाइन स्टोर खोला है और इतने कम समय में ही उनका दस फीसदी से ज्यादा बाजार पर कब्जा हो गया है। उनका व्यापार दस प्रतिशत प्रतिमाह की दर से तेजी से बढ रहा है। खरीददारी का रुझान बताते हुए उन्होंने कहा कि जापानी लोगों को भारत की पैकड मसालेदार चटपटी तरी वाली सब्जियां खूब भा रही है। सौमैय्या बताते है कि उन्हें पूरे जापान से प्रवासी भारतीयों से आर्डर मिलते हैं। टोक्यो में उनके सबसे बडे बाजार हैं। पूरे जापान में करीब 20 हजार भारतीय परिवार है जो उनसे चावल, मसाले, घी, आटा, मेवा आदि खरीदते हैं। वह बताते हैं कि इंडोजिन डाट काम की शुरूआत से पहले वह एक भारतीय रेस्तरां चलाया करते थे। उन्होंने बताया कि जापान में भारत और भारतीय खाने के प्रति आकर्षण 2002-2003 के बाद बहुत तेजी से बढा। अब तो यहां कई जापानी आयोजनों में, बुफे में भारतीय व्यंजन परोसे जाते हैं तथा जापानी शादियों में भी हिंदुस्तानी खाने की स्टाल आसानी से देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि अमेरिका एवं कुछ देशों के दूतावासों में भी भारतीय फास्ट फूड विशेष रूप से समोसा, जलेबी मंगाई जाती है और वह खुद इसका इंतजाम करते हैं। अंबिका ट्रेडर्स के विनीत हिंगर ने बताया कि जापान में उनकी कंपनी का भारतीय खाद्य पदार्थ बाजार पर 75 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है। वह कहते है कि जापान में भोज्य पदार्थो के आयात से जुडे मानदंड अत्यंत सख्त होने से बडी दिक्कत होती है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी देशों में कीटनाशक संबंधी 12 से 13 टेस्ट किए जाते हैं। आक्सीटोसिन की मात्रा पूरे विश्व में तीन फीसदी तक अनुमन्य है लेकिन जापान में शून्य प्रतिशत। इसके अलावा अन्य बहुत सी जांचे की जाती हैं। लेकिन हिंगर इसके बावजूद बहुत उत्साहित है। उनका कहना है कि इतनी मुश्किलें होने के बावजूद मांग में 25 प्रतिशत की वृद्धि से स्पष्ट है कि यदि नियमों में व्यावहारिक ढील मिल सके तो यह आंकडा 50 फीसदी तक जा सकता है।
उन्होंने बताया कि उनका सालाना कारोबार एक अरब येन यानि लगभग एक करोड डालर से ज्यादा हो गया है तथा इस साल इसके सवा करोड डालर तक जाने की उम्मीद है।
अंबिका ट्रेडर्स, एमडीएच, गिट्स कैपिटल करी, गुजरात के मसाले, आटा, चावल, मेवा के अलावा अचार, पापड, नमकीन बिस्कुट की भी आपूर्ति करते है। इंडोजिन की तरह वह भी पूरे जापान में आपूर्ति करते हैं और वह 1998 से इस कारोबार में है।
टोक्यो के निशीकसाई इलाके में तीन भारतीय रेस्तरां चलाने वाली प्रवासी भारतीय महिला बेला चंद्राणी के अनुभव भी कुछ ऐसे ही है। निशीकसाई टोक्यो का वह इलाका है जहां भारतीय रहते है। टोक्यो में इनकी तादाद दो हजार से ढाई हजार के बीच है लेकिन चंद्राणी के रेस्तरां मैजिक आफ कलकत्ता में जापानियों की भीड रहती है। वह बताती है कि जापानी परिवारों के बच्चे अक्सर अकेले ही चले आते हैं और नान खाने की फरमाइश करते है। भारतीय टी बोर्ड की कर्मचारी के रुप में 1977 में जापान आई चंद्राणी जापान में भारतीय चाय की भी सबसे बडी आयातक है। वह हर तीन माह में एक बार कोलकाता जाती है और वहां चाय आर्डर करने से पहले खुद चख कर स्वाद की जांच करती है।
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Posted in Media Council at 1:40 pm by YUDHISTRA
कनाडा के दक्षिण वेंकूवर इलाके में पुलिस ने लूटपाट के आरोप में भारतीय मूल के दो किशोरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को लंबे अर्से से इनकी तलाश थी।
पुलिस ने 18 वर्षीय मनप्रीत जोहल और 19 वर्षीय संजीत सुनर को गिरफ्तार किया है। दोनों पर लूटपाट और हमले के दर्जनों आरोप हैं। पुलिस इन मामलों में एक और व्यक्ति की तलाश है।
किशोरों पर आरोप है कि मार्च में इन लोगों ने लूटपाट के दौरान तीन लोगों पर हमला किया था। उन पर आधी रात के समय सडकों पर घूमने वाले लोगों को निशाना बनाने का आरोप है। पुलिस ने जोहल को वेंकूवर शहर से और सुनर को टोरंटो के उपनगर ब्रेमटन से गिरफ्तार किया। पुलिस ने गिरफ्तारी के लिए उनके चित्र भी जारी किए थे।
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Posted in Media Council at 1:39 pm by YUDHISTRA
संयुक्त अरब अमीरात [यूएई] में भारतीयों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। दुबई में भारतीय दूतावास के एक अधिकारी के अनुसार इस वर्ष दुबई और उत्तरी अमीरात में अब तक 92 भारतीय आत्महत्या कर चुके हैं। दूतावास के आंकडों के अनुसार वर्ष 2006 में 109 तथा वर्ष 2007 में 118 भारतीयों ने आत्महत्या की।
ताजा घटना में छोटे से कस्बे फुजैराह के हबाब में एक श्रमिक ने शनिवार को कथित रूप से फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। श्रमिक के साथियों ने शनिवार को सुबह छह बजे उसकी मौत की सूचना दी। उसने एक निर्माणाधीन फैक्ट्री के पास आत्महत्या की। गल्फ न्यूज के समाचार में इस श्रमिक के साथियों के हवाले से बताया गया कि उसे रात में अंतिम बार फैक्ट्री परिसर में ही बने आवास में देखा गया था और छह घंटे बाद उसकी लाश बरामद की गई। वर्ष 2003 से ही यूएई में भारतीयों में आत्महत्या की बढती प्रवृत्ति देखी जा रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि मंहगाई के कारण यहां जीवन-यापन मुश्किल होता जा रहा है खासकर कम आमदनी वाले लोगों के लिए गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। वर्ष 2003 में यहां 40 तथा वर्ष 2004 में 70 और 2005 में 84 भारतीयों ने आत्महत्या की थी।
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Posted in NEWS FROM INDIA at 1:38 pm by YUDHISTRA
प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमेरिका यात्रा की जमकर तारीफ करते हुए उन्हें परमाणु करार को अंतिम पडाव तक लाने के लिए बधाई दी है।
अमेरिका में भारत के राजदूत रोनेन सेन द्वारा आयोजित सप्ताहांत रात्रिभोज में शरीक हुए कई प्रभावशाली प्रवासी भारतीयों ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति की जमकर तारीफ की। डेमोक्रेटिक पार्टी के साथ अपने खास संबंधों के लिए पहचाने जाने वाले होटल व्यवसायी संत सिंह चटवाल ने कहा कि परमाणु करार भारत-अमेरिका और प्रवासियों के लिए हर लिहाज से अहम है। इसके लिए 23 लाख प्रवासी अमेरिकियों ने मेहनत भी की है। चटवाल ने कहा कि सीनेट से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह प्रधानमंत्री के लिए जन्मदिन का देरी से मिला तोहफा होगा।
उत्तरी कैरोलीना के प्रभावशाली व्यवसायी स्वदेश चटर्जी ने बताया कि उन्होंने परमाणु करार के लिए समर्थन में कोई कसर नहीं छोडी। कई बार उन्हें कडे प्रतिरोध का सामना करना पडा लेकिन अंतत: ज्यादातर अमेरिकियों को समझ में आ गया यह समझौता भारत अमेरिका संबंधों को नया आयाम देगा। चटर्जी ने कहा कि वर्ष 2005 में जब इस समझौते पर बातचीत हुई थी तो आलोचकों का कहना था कि अमेरिकी संसद इसे कभी मंजूरी नहीं देगी लेकिन अब देखिए प्रतिनिधि सभा इसे पारित कर चुकी है और सीनेट भी इसे जल्द मंजूरी देने वाली है। चटर्जी का कहना है कि पिछले साल उन्होंने कैरी से वाशिंगटन तक 69 बार यात्रा की और जनसमर्थन जुटाया। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजीशियन ऑफ इंडियन ओरिजन के डाक्टर प्रसाद श्रीनिवासन ने कहा कि प्रवासी भारतीय परमाणु करार को लेकर बेहद उत्साहित हैं।
इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस के महासविच जार्ज वर्गीज ने कहा कि डा. सिंह प्रवासियों और मातृभूमि के बीच सेतु बनकर उभरे हैं। परमाणु करार दोनों देशों को और करीब लाएगा। ग्लोबल आर्गेनाइजेशन फॉर पीपुल्स ऑफ इंडियन ओरिजन के थामस अब्राहम ने बताया कि भारत पर लगे 34 साल के लंबे प्रतिबंधों को हटा लिया गया है इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढेगा।
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Posted in Inter Religous Harmony Council, NEWS FROM INDIA, THE SANGAM FOUNDATION at 9:31 am by YUDHISTRA
In the western state of Jharkhand, Hindu villagers attacked Christians of a Believers’ Church and pressured them to “reconvert” to Hinduism in Talatad village (under Patratu police station) in Hazaribagh district on Sunday (Sept. 14), reported the Christian Legal Association.
Pastor Cyril Tamgariaand 18 others were worshiping in the house of Badhi Oraon when Hindu extremists surrounded the house. They beat them, took them forcibly to a temple in a nearby jungle and asked them to “return” to their oldf aith. Local Christians reported the incident to police, however, and officers freed the Christians.
(Source: “Violence Spreads to Five More States in India”, CompassDirect, Sept 16, 2008)
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Posted in Inter Religous Harmony Council, NEWS FROM INDIA, THE SANGAM FOUNDATION at 9:28 am by YUDHISTRA
In the wake of the recent persecution wave that broke out all across Orissa the fires of communal hatred now seems to be spreading in Chhattisgarh as well.
On 5th September 2008, Durg District of Chhattisgarh State witnessed a heinous and cowardly assault on four nuns belonging to Missionaries of Charity (Mother Teresa order). The nuns were travelling with the two accomplices’ from Raipur to Indore along with few infants when around 6 pm the Vishwa Hindu Parishad (World Hindu Council) and Bajrang Dal extremists boarded the train and amidst slogan shouting dragged them out and started assaulting them. Thrashing them and physically assaulting them they dragged them to the nearby police station.
As the news spread a group of local pastors immediately approached Mohan Nagar Thana where the Nuns were taken to, and protested the incident demanding to register FIR against the VHP and Bajrang Dal ruffains, but the police favoring the culprits refused to do so.
The pastors then approached Mr. Prem Prakash Pandey the Speaker of Chhattisgarh Legislative Assembly and registered their protest. But the BJP leader, turning the blind eye to the incident instead misbehaved with the pastors.
Till the reporting of this incident no FIR has been launched. It is reported that the Nuns have sustained severe injuries and were taken to Raipur after the medical checkup.
The names of four Nuns are Sister Vinaisa(58), Sister Mamta(65), Sister Leena(63) and Sister Kripa(27) all belonging to the Missionaries of Charity.
The local newspapers are also favoring with the BJP ruled authority and giving the headlines in such a way which demeans the work that Christian missionaries are doing. A local daily, Haribhoomi, carried out this incident as “Manas Taskari ka Bhandaphor”( Human Trafficking exposed) accusing the four nuns of trafficking the infants without any evidence whatsoever.
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Posted in Inter Religous Harmony Council, NEWS FROM INDIA, THE SANGAM FOUNDATION at 9:26 am by YUDHISTRA
Jamsethpur: St Mary’s Church was attacked by activists belonging to the Sangh Parivar at Bistpur in Jamsethpur of Bihar on 25 September 2008.
The miscreants broke the altar, the chalice and the musical instruments. They also damaged some articles kept inside the church. Stones were also pelted at a statue placed in a glass enclosure outside.
Bishop Shillic Stooph condemned the attack and sought security for the Christian community and their properties in the area.
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Posted in Inter Religous Harmony Council, NEWS FROM INDIA at 9:23 am by YUDHISTRA
Sunday, 23 November 2003
Christian leaders in the northeastern state of Manipur held an emergency meeting on April 22 to discuss the attack on a church in Thoubal district on April 19.
During the four-hour meeting, delegates formed a fact-finding committee to look into the attack on the Believer’s Church. They also decided to form Inter-Church Peace Council and agreed to contact the Manipur State Minorities Commission to discuss the plight of Christians.
Believer’s Church, situated on the outskirts of Lamding village in the Hindu-dominant Tentha Lamkhai area, was completely destroyed and four Christians were injured in the attack. The church had already been attacked twice and a local court had ordered the police to provide security while reconstruction took place. The villagers asked members of the Believer’s Church to abandon the premises or “face the consequences”.
Mohammed Kamaruddin, personal assistant to the Superintendent of Police in Thoubal district, said though the court had ordered the local police to take action, “We do not know if the security was provided.” “We have arranged for security but only as a patrol,” said Mangal Jao Singh, another member of the superintendent’s staff. “We have not deployed policemen (permanently) at the church.”
Rev S Prim Vaiphei, Pastor of the Believer’s Church, said, “A mob of 200 Hindus overpowered (the patrol) and succeeded in launching an attack.” “The mob, carrying dangerous weapons like axes, sickles, pickets, sticks and torches, set fire to our church and violently attacked our church members belonging to the Meitei tribe in Lamding village, about 35 km southeast of the capital city of Imphal,” he said.
“Mr. Romol, a local believer, was severely injured and had to be hospitalised,” Vaiphei added. “But he is out of danger now.” Three other church members S Tombi, O Tiken, and L Thoiba received minor injuries and were given basic first-aid.
In a letter to the Fire Brigade Department of Thoubal district, the Believer’s Church claimed the loss due to arson and physical destruction of the church was about Rs 4,45,000 ($10,350).
The church building, which was still under construction, had a worship hall, kitchen and parsonage. Kitchen items, personal belongings and construction equipment stored at the building were damaged in the attack. The police arrested three suspects, identified as Nahakpam Inao, Khumanthem Gojao and Laishram Ibomcha.
The attack was the third on the Believer’s Church since the beginning of the year. On 8 March, about 20 people attacked the church and dismantled its boundary wall. “On 11 April, more than 100 people tried to destroy the church,” said Vaiphei. “They used filthy and derogatory words, asking us to vacate the place. However, the police came and prevented them from desecrating the church.”
On 23 November 2004, a crowd of Hindus demolished the church while construction was underway. Following the attack, the Deputy Commissioner (DC) called for a meeting between members of the church and the Hindu community. Seeing that the Hindus strongly opposed the construction of the church, the DC imposed Section 144 of the Criminal Procedure Code and prohibited all persons from entering the building.
This led the church to file a civil suit. The court then passed an injunction order, directing local authorities to provide a security guard for the church to ensure its peaceful construction.
The issue of attacks on minority Christians was raised during the March session of the State Assembly. The Chief Minister said he would take steps to end the violence.
Courtesy: AICC
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